Sunday, July 11, 2021
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रहे सावधान 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाला महातूफान टकरा सकता है धरती से, ज़िन्दगी हो सकती है अस्त व्यस्त
रहे सावधान 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाला महातूफान टकरा सकता है धरती से, ज़िन्दगी हो सकती है अस्त व्यस्त
धरती से एक ऐसा तूफान टकराने वाला है जिसकी रफ्तार तकरीबन 1.6 मिलियन (16 लाख ) किलोमीटर प्रति घंटा है। सुन कर आप चौंक गए न जी हां यह सच है। एक शक्तिशाली सोलर तूफान बहुत तेजी से धरती की ओर बढ़ रहा है। इसकी रफ्तार 1.6 मिलियन (16 लाख) किलोमीटर प्रति घंटा है। US स्पेस एजेंसी NASA का कहना है कि इसकी रफ्तार बढ़ भी सकती है। तूफान धरती से रविवार या सोमवार को किसी भी समय टकरा सकता है।
माना जा रहा है कि इस तूफान से धरती के मैग्नेटिक फील्ड पर गहरा असर पड़ सकता है। इस असर से रात में आसमान जगमगा उठेगा। यह नज़ारा आपको धरती के नार्थ या साउथ पोल पर दिख सकता है।
Spaceweather.com वेबसाइट के मुताबिक, विज्ञानिको की माने तो इस सोलर तूफान के कारण आपके फोन, सैटेलाइट टीवी व GPS नेविगेशन पर खासा असर पड़ सकता है। सैटेलाइट जाम हो सकते है। यहाँ तक कि बिजली के लाइनों में करंट भी बढ़ सकता है। जिससे ट्रांसफार्मर भी उड़ सकता है। साथ ही साथ विमान सेवाओ पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।
पहले भी आ चुके हैं सोलर तूफान
इससे पहले 1989 में सोलर तूफान आया था। इसके चलते कनाडा के क्यूबेक शहर की बिजली करीब 12 घंटे के लिए चली गई थी। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। 1859 में जियोमैग्नेटिक तूफान आया था। इसने यूरोप और अमेरिका में टेलीग्राफ नेटवर्क को नष्ट कर दिया था। कुछ ऑपरेटर्स ने बताया था कि उन्हें इलेक्ट्रिक का झटका लगा। कुछ लोगों का कहना था कि तूफान के कारण बिना बैट्री के ही इक्विपमेंट्स काम कर रहे थे। रोशनी इतनी तेज थी कि अमेरिका के कुछ हिस्सों में लोग अखबार तक पढ़ सकते थे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक शक्तिशाली सोलर तूफान काफी तबाही मचा सकता है। यह सबसे खराब तूफान से 20 गुना अधिक आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।
सोलर तूफान से जुड़े अहम सवाल-जवाब...
सवाल: कैसे उठता है सोलर तूफान?
जवाब: बुनियादी तौर पर सूर्य गैसों का एक गोला है। इसमें 92.1% हाइड्रोजन और 7.8% हीलियम गैस है। सूर्य में मैग्नेटिक या चुंबकीय गतिविधियां चलती रहती हैं। इनमें औसतन 11 साल के अंतराल पर गतिविधियां चरम पर होती हैं, जिन्हें सोलर साइकल कहते हैं।
सोलर साइकल के दौरान अरबों टन गर्म गैसों के गुबार (फव्वारे, लपट) धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। इनके साथ ही सूर्य से आए चार्ज्ड पार्टिकल धरती के वायुमंडल में चुंबकीय तूफान मचा देते हैं। इसे सोलर तूफान कहते हैं।
सवाल: कितने समय बाद आता है सोलर तूफान?
जवाब: वैज्ञानिकों का कहना है कि हर 11 साल बाद सोलर तूफान आता है। पीक टाइम में एक दिन के भीतर कई तूफान आ सकते हैं। बाकी समय में हफ्ते में एक सोलर तूफान भी आ सकता है। सूर्य की मौजूदा गतिविधियों के हिसाब से 2024 में सोलर तूफान का पीक दिख सकता है।
सोलर साइकल के दौरान अरबों टन गर्म गैसों के गुबार धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। इनके साथ सूर्य से आए चार्ज्ड पार्टिकल धरती के वायुमंडल में चुंबकीय तूफान मचा देते हैं।
सवाल: कितना विनाशकारी हो सकता है सोलर तूफान?
जवाब: धरती से अक्सर ही सोलर तूफान टकराते रहते हैं। कई बार तो हमें कुछ पता ही नहीं चलता। न तो कोई आवाज सुनाई देती है और न ही आकाश में लाइट्स दिखती हैं। कई बार सोलर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो जाता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर पड़ता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक शक्तिशाली सोलर तूफान काफी तबाही मचा सकता है। यह सबसे खराब तूफान से 20 गुना अधिक आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।
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