Sunday, August 22, 2021
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संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है -पण्डित कल्किराम
संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है -पण्डित कल्किराम
संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है -पण्डित कल्किराम
रिपोर्ट : बिस्मिल्लाह खान
अयोध्या- ब्रह्म मुहूर्त मे आरम्भ कमल पुष्पों से यज्ञाहुति के साथ ही रामादल मुख्यालय पर पवित्र श्रावण मास मे आयोजित मृतसंजीवनी महामृत्युंजय महानुष्ठान की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई,जानकारी देते हुए रामादल अध्यक्ष पण्डित कल्किराम ने कहा कि -संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है इसलिए ब्राह्मण को इस भूलोक का देवता कहा गया है राष्ट्रहित के लिए समर्पित होकर ⚘
ब्रह्म मुहूर्त मे आरम्भ कमल पुष्पों से यज्ञाहुति के साथ ही रामादल मुख्यालय पर पवित्र श्रावण मास मे आयोजित मृतसंजीवनी महामृत्युंजय महानुष्ठान की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई,जानकारी देते हुए रामादल अध्यक्ष पण्डित कल्किराम ने कहा कि -संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है इसलिए ब्राह्मण को इस भूलोक का देवता कहा गया है राष्ट्रहित के लिए समर्पित होकर
ब्रह्म मुहूर्त मे आरम्भ कमल पुष्पों से यज्ञाहुति के साथ ही रामादल मुख्यालय पर पवित्र श्रावण मास मे आयोजित मृतसंजीवनी महामृत्युंजय महानुष्ठान की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई,जानकारी देते हुए रामादल अध्यक्ष पण्डित कल्किराम ने कहा कि -संसार ईश्वर के आधीन है और ईश्वर मन्त्र के आधीन होता है जबकि मन्त्र ब्राह्मण के आधीन होता है इसलिए ब्राह्मण को इस भूलोक का देवता कहा गया है राष्ट्रहित के लिए समर्पित होकर आध्यात्मिक अनुसंधान महानुष्ठान ब्राह्मण का ही मूल कर्तव्य है।वर्तमान समय मे सनातन समाज को दिग्भ्रमित करने का जो कुचक्र रचा जा रहा है उसको ध्वस्त कर सनातन समाज की शत-प्रतिशत एकजुटता ही भावी पीढ़ी के स्वर्णिम भविष्य निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने मे सामर्थ्यवान है।
इसलिए इस कर्तव्य को पूरा करने हेतु आध्यात्मिक शक्तियों के आवाहन की प्रक्रिया निरन्तर एक के बाद एक महानुष्ठान महायज्ञ के रूप में संचालित रहेगी।राष्ट्र विरोधियों के समूलनाश का सबसे उपयुक्त समय चल रहा है और इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए तभी इक्कीसवीं सदी उज्वल भविष्य की परिकल्पना सिद्ध और साकार होगी।
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