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Sunday, February 10, 2019

सरस्वती पूजा 2019: वीणापाणी की हुई पूजा अर्चना, पूरा शहर शारदामयी हुआ

सरस्वती पूजा 2019: वीणापाणी की हुई पूजा अर्चना, पूरा शहर शारदामयी हुआ

मुज़फ्फरपुर, 10 feb 2019



आज पूरे भारत में माँ शारदे की आराधना की गई। सभी वर्गों के लोगो ने माँ सरस्वती की आराधना कर सुख शांति की कामना की।



मुजफ्फरपुर में भी इस त्यौहार की धूम दिखी, कॉलेज, स्कूल, और अन्य संस्थानों से लेकर मंदिर गली मौहल्ले और घरो में भी माँ शारदे की पूजा की गई। जहाँ बड़ो ने घर और अपनों के लिए सुख समृद्धि की कामना की वही विद्यार्थियों ने परीक्षा में सफल होने की कामना की।



शहर के कई जगहों में माता के भक़्तों ने अपनी माता की अलग अलग छवि प्रस्तुत की जिसमे आधार कार्ड में माता की मूरत हो या जुट से बनी माता हो। सभी मूर्तियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।



शहर के कुछ जगहों पर शाम के समय माता का भंडारा भी कराया गया। जहां भक्तो ने माता के प्रशाद का भोग कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

Saturday, February 09, 2019

Saraswati puja 2019: आज इस तरह करें सरस्वती पूजा, जानें मंत्र और पूरी पूजा विधि

Saraswati puja 2019: आज इस तरह करें सरस्वती पूजा, जानें मंत्र और पूरी पूजा विधि

10 Feb 2019



आज पूरे देश में वसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार मनाया जा रहा है। पंचमी तिथि शनिवार 9 फरवरी को दिन में 8 बजकर 55 मिनट से लग रही है, जो रविवार 10 फरवरी को दिन में 9 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि ग्राह्य होने से 10 फरवरी को ही वसंत पंचमी मनाई जाएगी।

इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष दिन माना जाता है और मां सरस्वती ही बुद्धि और विद्या की देवी हैं। मान्यता है कि जिस छात्र पर मां सरस्वती की कृपा हो उसकी बुद्धि बाकी छात्रों से अलग और बहुत ही प्रखर होती है।
सरस्वती पूजा विधि और मंत्र

मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप, अगरबत्ती, गुगुल जलाएं जिससे वातावरण में सकारात्मक उर्जा का संचार हो और आसपास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी।

प्रात:काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात क्लश स्थापित कर भगवान गणेश और नवग्रह की विधिवत पूजा करें. फिर मां सरस्वती की पूजा करें. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन और स्नान कराएं. फिर माता का श्रृंगार कराएं. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाईयां अर्पित करें. श्वेत फूल माता को अर्पण करें.

कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है. विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम और पुस्तकों का दान करें. संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व मां को बांसुरी भेंट करें.

इस मंत्र से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती

''एमम्बितमें नदीतमे देवीतमे सरस्वति! अप्रशस्ता इव स्मसि प्रशस्तिमम्ब नस्कृधि! ''

अर्थात - मातृगणो में श्रेष्ठ, देवियों में श्रेष्ठ हे ! मां सरस्वती हमें प्रशस्ति यानी ज्ञान, धन व संपति प्रदान करें।

यदि पूर्व में दिए मंत्र को पढ़ने में परेशानी हो तो इस सरल मंत्र को पढ़कर मां सरस्वती को प्रसन्न कर ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

Sunday, January 13, 2019

Lohri 2019: पंजाब में दुल्ला भट्टी से जुड़ा है लोहड़ी का त्यौहार

Lohri 2019: पंजाब में दुल्ला भट्टी से जुड़ा है लोहड़ी का त्योहार

नई दिल्ली
Updated: Sun, 13 Jan 2019



lohri 2019: लोहड़ी का पर्व इस साल 13 जनवरी (रविवार) को मनाया जा रहा है। यह त्योहार फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा हुआ है। किसान अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में लोहड़ी मनाते हैं। लोहड़ी की रात को साल की सबसे लंबी रात माना जाता है। इस त्योहार से कई आस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि लोहड़ी पर अग्नि पूजन से दुर्भाग्य दूर होते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
लोहड़ी पर्व को मनाने के पीछे कई पौराणिक व प्राचीन कहानिया प्रचलित हैं। आगे पढ़ें लोहड़ी मनाने की कुछ मान्यताएं व कहानियां-
पंजाब में लोहड़ी का त्योहार दुल्ला भट्टी से जोड़कर मनाया जाता है। कहा जाता है कि मुगल शासक अकबर के समय में गरीबों के मददगार दुल्ला भट्टी पंजाब में रहते थे। उन्हें नायक माना जाता था। उस समय लड़कियों को गुलामी के लिए अमीरों को बेचा जाता था। दुल्ला भट्टी ने लड़कियों को मुक्त कराया और उनकी शादी कराई। इस त्योहार के पीछे धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई हैं। लोहड़ी पर अग्नि प्रज्ज्वलित करने को लेकर मान्यता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है।

होलिका की बहन लोहिता का वध-
एक विश्वास यह भी है लोहड़ी का जन्म होलिका की बहन के नाम पर हुआ। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन कंस ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए लोहिता राक्षसी को गोकुल भेजा था, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने मार दिया था। इसी कारण लोहिता पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार नवविवाहित जोड़े और परिवार में जन्मे पहले बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन नई दुल्हन को उसकी ससुराल की तरफ से तोहफे दिए जाते हैं तो वहीं नए शिशु को उपहार देकर परिवार में उसका स्वागत किया जाता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

Input: Live Hindustan

Thursday, November 15, 2018

भाई बहन के त्याग समर्पण का त्यौहार सामा चकेवा हुआ आरंभ, कार्तिक पूर्णिमा को होगा संपन्न

आर्या न्यूज़ लाइव
मुजफ्फरपुर न्यूज़ डेस्क
15 नवम्बर 2018, 23:22 pm IST
अनुराग श्रीवास्तव
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ज़िन्दगी क्या है एक कहानी की किताब, जिसे आप जितना पलटो उसके हर पन्ने में कोई न कोई किस्से कहानी पढ़ने को जरूर मिल जाती है। ऐसा ही एक किस्सा है सामा चकेवा की। सामा चकेवा बिहार में मैथिली भाषी लोगों का यह एक प्रसिद्ध त्यौहार है। जिस तरह भारत में रक्षाबंधन और भाई दूज भाई बहन के रिश्ते को दर्शाता है ठीक उसी तरह भाई – बहन के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध को दर्शाने वाला सामा चकेवा का यह त्यौहार नवम्बर माह के शुरू होने के साथ मनाया जाता है। यह आमतौर पर छठ पर्व के समाप्त होने के बाद मनाया जाता है जो कार्तिक पूर्णिमा के बाद समाप्त हो जाता है। इसका वर्णन हमे हमारे पुराणों में भी मिलता है। कहते हैं की सामा भगवान श्री कृष्ण की पुत्री थी जिनपर अवैध सम्बन्ध रखने का गलत आरोप लगाया गया था, जिसके कारण सामा के पिता श्री कृष्ण ने गुस्से में आकर अपनी ही पुत्री को मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा दे दी। लेकिन अपने भाई चकेवा के प्रेम और त्याग के कारण वह पुनः पक्षी से मनुष्य के रूप में आ गयी |

क्या होता है इस पर्व में ?

शाम होने पर युवा महिलायें अपनी संगी सहेलियों की टोली में मैथिली लोकगीत गाती हुईं अपने-अपने घरों से बाहर निकलती हैं। उनके हाथों में बाँस की बनी हुई टोकड़ियाँ रहती हैं| टोकड़ियों में मिट्टी से बनी हुई सामा-चकेवा की मूर्तियाँ , पक्षियों की मूर्तियाँ एवं चुगिला की मूर्तियाँ रखी जाती है। मैथिली भाषा में जो चुगलखोरी करता है उसे चुगिला कहा जाता है। मिथिला में लोगों का मानना है कि चुगिला ने ही श्री कृष्ण से सामा के बारे में चुगलखोरी की थी | सामा खेलते समय महिलायें मैथिली लोक गीत गा कर आपस में हंसी – मजाक भी करती हैं | भाभी ननद से और ननद भाभी से लोकगीत की ही भाषा में ही मजाक करती हैं | अंत में चुगलखोर चुगिला का मुंह जलाया जाता है और सभी महिलायें पुनः लोकगीत गाती हुई अपने – अपने घर वापस आ जाती हैं |ऐसा आठ दिनों तक चलता रहता है | यह सामा-चकेवा का उत्सव मिथिलांचल में भाई -बहन का जो सम्बन्ध है उसे दर्शाता है | यह उत्सव यह भी इंगित करता है कि सर्द दिनों में हिमालय से रंग – बिरंग के पक्षियाँ मिथिलांचल के मैदानी भागों में आ जाते हैं |



बदलते समय के साथ आया है बदलाव

पहले महिलायें अपने हाथ से ही मिट्टी की सामा – चकेवा बनाती थीं | विभिन्न रंगों से उसे सवांरती थी | लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होता है | अब बाजार में रंग – बिरंग के रेडीमेड मिट्टी से बनी हुई सामा – चकेवा की मूर्तियाँ उपलब्ध हैं | महिलायें इसे ही खरीदकर अपने घर ले आती हैं | लेकिन अब मिथिला की इस संस्कृति पर , ऐसी लोकगीतों पर , ऐसी लोकनृत्यों पर लोगों की आधुनिक जीवनशैली के द्वारा , एकल परिवार में बृद्धि के द्वारा एक प्रकार से चोट पहुंचाया जाने लगा है तथा रोजगार के कारण लोगों के अन्यत्र रहने से अब महिलायें सामा-चकेवा का उत्सव नहीं मनाती हैं |कहीं – कहीं हम सामा-चकेवा के अवसर पर गांवों की  सड़कों पर , शहरों की गलियों में सामा – चकेवा के गीत सुनते हैं | अब  यह उत्सव साधारण नहीं रहा |

आठ दिनों तक मनाया जाता है

सामा- चकेवा का उत्सव पारंपरिक लोकगीतों से जुड़ा है | यह उत्सव मिथिला के प्रसिद्ध संस्कृति और कला का एक अंग है जो सभी समुदायों के बीच व्याप्त सभी बाधाओं को तोड़ता है | यह उत्सव कार्तिक शुक्ल पक्ष से सात दिन बाद शुरू होता है | आठ दिनों तक यह उत्सव मनाया जाता है , और  नौवे दिन बहने अपने भाइयों को धान की नयी फसल की
चुरा एवं दही खिला कर सामा- चकेवा के मूर्तियों को तालाबों में विसर्जित  कर देते हैं। गाँवों में तो इसे जोते हुए खेतों में विसर्जित किया जाता है।

क्या है कहानी इस पर्व की

सामा-चकेवा के उत्सव का सम्बन्ध सामा की दुःख भरी कहानी  से है। सामा कृष्ण की पुत्री थी | जिसका वर्णन पुराणों में भी किया गया है | कहानी यह है कि एक दुष्ट चरित्र वाले व्यक्ति ने एक योजना रची | उसने सामा पर गलत आरोप लगाया कि उसका अवैध सम्बन्ध एक तपस्वी से है | उसने कृष्ण से यह बात कह दिया | कृष्ण को अपनी पुत्री सामा के प्रति बहुत ही गुस्सा हुआ | क्रोध में आकर उसने सामा को पक्षी बन जाने का श्राप दे दिया | सामा अब मनुष्य से पक्षी बन गयी।

जब सामा के भाई चकेवा को इस प्रकरण की पूरी जानकारी हुई तो उसे अपनी बहन सामा के प्रति सहानुभूति हुई | अपनी बहन को पक्षी से मनुष्य रूप में लाने के लिए चकेवा ने तपस्या करना शुरू कर दिया | तपस्या सफल हुआ | सामा पक्षी रूप से पुनः मनुष्य के रूप में आ गयी |अपने भाई की स्नेह और त्याग देख कर सामा द्रवित हो गयी |वह अपने भाई की कलाई में एक मजबूत धागा राखी के रूप में बाँध दी |उसी के याद में आज बहनें अपनी भाइयों की कलाई में प्रति वर्ष बांधती आ रही हैं |

    

Wednesday, November 14, 2018

Chhath Puja: उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ सम्पन हुआ महापर्व छठ, देश विदेश में रही धूम

आर्या न्यूज़ लाइव
मुजफ्फरपुर न्यूज़ डेस्क
14 नवम्बर 2018, 15:22 pm IST

● अनुराग श्रीवास्तव
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लोक आस्था का महान पर्व छठ उदयगामी सूर्य को अर्घ देने के साथ ही समाप्त हो गया। छठव्रती द्वारा 36 घंटे का कठोर ये व्रत आज पारण के साथ समाप्त किया गया। छठव्रती भोर होने के साथ ही घाटो की ओर प्रस्थान करने लगे। फिर छठव्रती ने घाटो में प्रवेश कर सूर्य के उगने की प्रतीक्षा करने लगे।



सूर्य ने भी खेली आँख मिचौली

जैसे जैसे अर्घ देने का वक़्त होने लगा सूर्यदेव ने भी भक़्तों के साथ आँख मिचौली खेलना आरंभ कर दिए। देखते ही देखते मौसम ने थोड़ा करवट लिया और धुंध ने थोड़े समय के लिए सूर्य को अपने आगोश में ले लिया। ठण्ड बढ़ी पर भक़्तों की आस्था कम नहीं हुई। थोड़े समय के बाद कोहरे ने भक़्तों की घोर आस्था के आगे घुटने टेक दिए।



सूर्य उदय के साथ चल पड़ा अर्घ देने का दौर

जैसे ही सूर्य ने अपनी उषा की लालिमा बिखेरी वैसे ही भक़्तों की आस्था अपने चरम पर पहुँच गई। देखते ही देखते सूर्य को अर्घ देने का सिलसिला शुरू हो गया। सूर्य को अर्घ देने के बाद व्रतियों ने धुप हवन किये फिर प्रसाद वितरण किये गए।

अंतिम अर्घ को लेकर प्रशासन रही मुस्तैद

छठ एक महापर्व है जिसे लाखो श्रद्धालु करते है। घाटो पर भी लाखों के संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहते है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने अपनी ओर से घाटो पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इन्तेजाम कर रखे थे। छठ के अंतिम दिन भी प्रशासन की ओर से वही कड़े इंतजाम देखने को मिली। खुद एसएसपी डीएम और बड़े आला अधिकारियों ने बारंबार घाटो की निगरानी करते नज़र आये।



देश हो विदेश छठ की रही धूम

छठ अब केवल बिहार या बिहारियों का पर्व नहीं रहा अपितु अब यह पर्व ग्लोबल पर्व का दर्जा हासिल कर चुका है। ये एक ऐसा पर्व बन चूका है जिसे केवल बिहार ही नहीं पूरे भारतवर्ष या यूँ कहे पुरे विश्व में मनाया जाने लगा है। एक ओर जहां चाइना के अखबारो ने भी छठ की खबरों को अपने अखबार के पन्नो पर प्रमुखता से छापा और माना कि ये पर्व भारत का एक महान पर्व है, वही विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगो ने पूरे आस्था के साथ इस पर्व को किया। इस पर्व को चाइना, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों में पूरी आस्था के साथ मनाया गया। यही नहीं कुछ विदेशियों द्वारा भी इस पर्व को मनाया गया।



छठ पर्व पर साम्प्रदायिक सौहार्द के रंग दिखे

इस पर्व पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने दिल को खुश कर दिया। इस पर्व में वैसे हर तबके के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है पर मुस्लिम समुदाय के द्वारा जो तस्वीर पेश की गई उसने धर्म की राजनीती करने वालो के गालों पर जोरदार तमाचा कसा। जहाँ एक ओर कुछ लोग धर्म की राजनीती कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहते है। वही दुसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगो ने छठ घाटो की सफाई कर यह जता दिया की आज भी दुनिया में कौमी एकता कायम है। यही नहीं कुछ मुस्लिम महिलाओं और पुरुषो के द्वारा छठ का महान पर्व किया गया। उन्होंने ये पर्व कर के ये सन्देश दिया की धर्म चाहे कोई भी हो ईश्वर सबका एक है।

Tuesday, November 13, 2018

Chhath Puja: मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में छठ की रही धूम, व्रतियों ने दिए सूर्य को अर्घ


आर्या न्यूज़ लाइव
14 नवम्बर 2018, 00:55 am IST
मुजफ्फरपुर न्यूज़ डेस्क

लोक आस्था के महान पर्व छठ का पहला अर्घ्य मंगलवार को भक्ति के साथ दिया गया। मुजफ्फरपुर ज‍िला सहित उत्तर बिहार  ज‍िलों में स्थित घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। उत्तर बिहार के पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी व दरभंगा में हर तरफ छठी मइया की भक्ति दिख रही थी। छठ के गीतों से वातावरण गुंजायमान रहा। अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य  देने के पूर्व व्रती पानी में खड़ा होकर सूर्य का ध्यान लगाया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में स्थित छठ घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। लाइटिंग की सजावट देखते ही बन रही थी। घाटों पर व्रतियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसपर पूरा ध्यान दिया जा रहा था। घाटों पर सुरक्षा के लिए दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी के अलावा पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी।

पानी में खड़ा होकर लगाया ध्यान



पहला अर्घ्य देने से पूर्व व्रतियों ने पानी में खड़ा होकर छठी मइया का ध्यान लगाया। कुछ देर तक ध्यान लगाने के बाद अर्घ्य द‍िया। मंगलवार की संध्या पूरे विधिपूर्वक कोसी की पूजा की गई। कोसी का दीप जलाया गया। इसके बाद रात्रि पहर छठ घाट पर भी कोसी का दीप जलाकर पूजा की गई। बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार द‍िवसीय पूजा का समापन हो जाएगा। अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण के साथ अपने 36 घंटें का न‍िर्जला व्रत को समाप्त करेंगी। यहां बता दे कि नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय लोक उपासना के पर्व छठ की शुरूआत रविवार को हुई थी। पर्व के दूसरे दिन सोमवार को खरना की पूजा की गई।

जिलाधिकारी ने ल‍िया घाटों का जायजा




मुजफ्फरपुर के ज‍िलाध‍िकारी मोहम्मद सोहैल ने शहर के अखाड़ाघाट सहित कई अन्य घाटों का जायजा ल‍िया।इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर व‍िशेष रूप से फोकस किया। छठ घाटों की स्थिति पर जिला प्रशासन के अधिकारी नजर रखें हुए थे। अधिकारियों की टीम घाटों का लगातार निरीक्षण कर रही थी। इस क्रम में घाटों पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सहित पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे थे। एनडीआरएफ की टीम को सक्रिय कर रखा गया था। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर हर आवश्यक इंतजाम किए गए थे।

विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का लिया स्वाद

घाटों के बाहर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद  बच्चों के अलावा बड़े लोग ले रहे थे। किसी को गुपचुप को किसी को चाट पसंद था। सभी अपने-अपने पसंद के अनुसार व्यंजन का स्वाद ले रहे थे। वहीं बच्चों के लिए कई प्रकार के खिलौने भी बिक रहे थे।

मुख्यमंत्री ने दिया अर्घ शहरवासियों के लिए की सुख समृद्धि की कामना 



मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार की शाम सात सकुर्लर रोड स्थित सरकारी आवास से भगवान सूर्य को अपने परिजनों के साथ पहला अर्घ्य अर्पित किया। राज्यवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इसके बाद नासरीगंज घाट से खाजेकलां घाट तक उन्होंने स्टीमर से सभी घाटों का भ्रमण किया एवं उपस्थित श्रृदालुओं का अभिवादन भी किया। भ्रमण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे महापर्व छठ के अवसर पर सभी लोगों को शुभकामना देते हैं। उन्होंने कहा कि यह धरती सूर्य के ऊपर ही निर्भर है।

हम लोग इन्हें प्रत्यक्ष रुप में देखते हैं और पूजा करते हैं। सूर्य की पूजा प्रकृति की पूजा है। कहा कि घाटों को बेहतर तरीके से तैयार किया गया है। मैंने पहले भी दो बार सभी घाटों का निरीक्षण किया। सभी  विभागों ने मिलकर बहुत अच्छा इंतजाम किया है। भ्रमण के दौरान उनके साथ मंत्री नंद किशोर यादव, राणा रंधीर सिंह, जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर,विधान पार्षद ललन सर्राफा, डीजीपी केएस द्विवेद्वी, गृहसचिव आमिर सुभाहानी समेत कई वरीय अफसर साथ थे।

रामविलास पासवान ने भी दिया डूबते हुए सूर्य को अर्घ


पटना में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने पूरे परिवार के साथ अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया गया. इस दौरान उनके परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे. सांसद चिराग पासवान अपने सर पर दौरा उठाए दिखे. परिवार के सभी लोगों ने एक साथ भगवान भास्कर को जल चढ़ाया. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और सांसद चिराग पासवान ने पूरे बिहारवासियों समेत देसवासियों को महापर्व छठ की शुभकामनाएं दीं. साथ ही देश एवं बिहार में शांति की कामना की.

Chhath Puja: झारखंड में छठ पूजा की धूम, भक्तो ने दिए अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ



पाकुड़: आस्था का महापर्व छठ की धूम, भक्तों ने सद्भावना के साथ सूर्य को दिया अर्घ्य


पाकुड़: आस्था का महापर्व छठ की धूम पूरे जिले में देखी जा रही है. आज श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृधि की कामना की. शहर के कालीभसान पोखर, टीनबंगला पोखर, शिवशीतला मंदिर सहित पुरे जिले के दर्जनों पोखरों में छठ पूजा धूमधाम से मनाया गया.


इस दौरान डीसी दिलीप कुमार झा, इंस्पेक्टर एसएस तिवारी ने अपने परिवारों के साथ छठ घाट में पहला अर्ध्य दिया. साथ ही छठ के विभिन्न घाटो में पहुंचे और छठ पूजा को देखा. इस अवसर पर पुलिस प्रशासन भी पूजा में विधि वयवस्था में मुस्तैद दिखे.


छठ पर्व पर डूबते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य

पाकुड़ जिले के महेशपुर समेत आसपास लोक आस्था के इस महापर्व छठ के दूसरे दिन संध्या अर्घ्य में शामिल हुए. भक्तों ने सद्भावना और असीम भक्ति से छठ पूजा की संध्या में डूबते हुए सूरज को अर्घ्य दिया. लोक आस्था के इस महापर्व के चौथे दिन सूर्योदय का अर्घ्य दिया जाएगा. इसके साथ ही छठ पूजा का पर्व समाप्त हो जाएगा.

Input: News11

Monday, November 12, 2018

Chhath Puja: व्रतियों ने खाया खरने का प्रसाद अब 36 घंटे का व्रत शुरू


Chhath Puja: व्रतियों ने खाया खरने का प्रसाद अब 36 घंटे का व्रत शुरू

Arya News Live
news desk, 
12 Nov. 2018. 22:40 pm IST
अनुराग श्रीवास्तव

आज महापर्व छठ का दूसरा दिन था। आज के दिन व्रतियों ने   खरने का महाप्रसाद बनाया। व्रती शाम के समय छठ माँ की पूजा अर्चना की। अब समय के साथ छठ पर्व में भी कुछ बदलाव हुए है। वैसे तो ये पर्व तो गंगा के घाटों पर की जाती है पर अब बहुत से जगहों पर यह पर्व घरो पर ही घाट बना कर किये जाने लगे हैं। पर अभी भी छठ घाटो की एहमियत कम नहीं हुई है। अब भी कई छठव्रती गंगा के घाट पर आ कर ही छठ पर्व करते है। इसके मद्देनज़र आज घाटो और घरो दोनों जगहों पर छठव्रतियों द्वारा खरने का महाप्रसाद बनाते देखा गया। बहुत से व्रती जो बाहर से गंगा घाट पर आते है वो इन्ही घाटो के आस पास रह कर छठ का महापर्व करते है। शाम होते ही छठव्रतियों ने मुह धो स्नान कर छठ मईया के लिए महाप्रसाद बनाया फिर उन्हें भोग लगाया। इसके बाद ये प्रसाद घरवालो के साथ साथ सगे संबंधियों और आस पड़ोस के लोगो के साथ बाँट कर खाया गया।



अब होगा 36 घंटो का कठोर निर्जला व्रत

खरने के बाद छठव्रतियों की असली परीक्षा अब शुरू हो चुकी है। अब से लेकर कुल 36 घंटो तक व्रती कठोर निर्जला व्रत करेंगे जो छठ के पारन के साथ समाप्त होगा। छठव्रती इस बीच ना तो अब कुछ खाएंगे और ना ही कुछ पिएंगे। छठव्रती कल छठ का पहला अर्घ सांझ अर्घ के रूप में देंगे और फिर उसके दूसरे दिन छठ का दूसरा व अंतिम अर्घ भोर अर्घ के रूप में देकर समाप्त करेंगे।